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Sunday, October 7, 2012

**जिसका बचपन पिता की पीठ पर जगा है***वही बुढ़ापे में पिता को  पीठ दिखाने में लगा है**
*************कटनी के साहित्यकारों द्वारा ***********************************************************************
                     ***   * कवि  नरेश जोगी सम्मानित *
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*वरिष्ट गीतकार श्री नरेश जोगी का वंदन अभिनन्दन स्थानीय ओम प्रकाश सरावगी संस्कार सदन कटनी के संस्कार सभागार में पूर्व *विधायक श्रीमती सरोज बच्चन नायक के मुख्य आतिथ्य ,वरिष्ट  पत्रकार नन्दलाल सिंह की अध्यक्षता ,के .एम .पुरवार ,संतोष *प्रीतम  ,,,रामखिलावन गर्ग ,एव अजय सरावगी के विशिष्ट आतिथ्य ,व्यंग कार मनोहर मनोज के संयोजन ,व्यंग्य शिल्पी प्रकाश *प्रलय के सञ्चालन मे  आयोजित किया गया ,....
 *               अतिथि  कवि नरेश जोगी क़ा शाल श्री फल ,एव पुष्प हारों से सम्मान अतिथियों के साथ ही नगर की अनेक साहित्यिक         *संस्थाओं  से उपस्थित कवि साहित्यकारों द्वारा किया गया ...
 * दूसरा चरण कवि नरेश जोगी के काव्य पाठ *दौलत यहाँ मुहब्बत ,दौलत ही सभ्यता  है ,दौलत क़ा धर्म पर भी गहरा असर रहा है 
ये तो शहर है उनका ,है जिनकी जेब मे दम .क्या हम से मुफलिसों क़ा कोई शहर रहा है .....शानदार शुरुआत हुई ,/---------------------कुर्सियों  पर अब पसर गई जिंदगी ,,चर्चित  कवि मनोहर मनोज की गजल ,व्यंग्य शिल्पी प्रकाश प्रलय की क्षणिका* जिसका बचपन पिताकी पीठ पर बैठकर जगा है* ,वही बुढ़ापे में पिता को पीठ दिखाने में लगा है** ,,,,,,,फुटपाथों के एक किनारे बैठे ,तुलसीदास मिले ,,रामनरेश विद्धार्थी ,मौत के क़दमों की आवाज़ नहीं होती ,,,अमर मलंग ,,,जीत के संसद क्या गए ,,रवि चतुर्वेदी ,किसी ने क़र्ज़ चुकाने की सजा पाई है ,,,सतीश आनंद ,..कोख से बेदखल बेटी याद तो आती होगी ,,,मुकेश चंदेरिया ,,,मुहब्बत में ज़मी दो गज जो मिल जाती ठिकाने की ,,सुरेश रजक नाकिस ,...शाम गली में हुए थे फायर वा  भाई वा ,,,राजेंद्र सिंह ठाकुर ,..खरा -खोटा हो गया हैं आदमी मुखोटा हो गया है ...गोपाल गुमसुम ,..हमारी ज़िन्दगी अब उसके नाम पर बुक हैं ,..शरद जायसवाल ,..मेरी यादों के जख्मों को कभी भरने नहीं देना ,,मनोज आनद ,..दोहे जिनका दर्द है ,दोहे ही उपचार ,,वैध यु ,एस तिवारी ,...जीने का हमको भी अंदाज़ सिखाया जाये ,,रविन्द्र रवि ,...मिलना ये रोज़ -रोज़ क़ा बदनाम न कर दे ,,चन्द्र किशोर चंदन ,..दिन प्रतिदिन बढती गई चोरों की तादाद  ,...रामखिलावन गर्ग ,..तू प्यार के गीत सुनाये जा ,,जगदीश त्रिपाठी ,..बढ़ी है दूरियां जब से रहे बैचेन तभी से दिल,,बी ,के .साहू ,,किस पंगुता के दौर से गुजरा किये है हम ,,राम दयाल गुप्ता ,,सिर्फ उन्हीं आखों में जल हैं ,,विष्णु बाजपेयी ,अथर्व तिवारी ,बेखौफ शानू आदि उपस्थित कविगणों ने गीत ,ग़ज़ल ,हास्य व्यंग्य की कविताओं के माध्यम से सम्मान समारोह को सम्पूर्ण गरिमा प्रदान की ,कार्यक्रम मे विन्देश्वरी पटेल , कमल खूबचंदानी,की उपस्थिति उल्लेखनीय रही ,.. कार्यक्रम के लिए आभार शाला  प्रबंधक शरद सरावगी एव प्राचार्य सुश्री राखी साहू द्वारा प्रदर्शित किया गया ,,,,,,,,,,,,,,,,,
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