यह मंच आपका है आप ही इसकी गरिमा को बनाएंगे। किसी भी विवाद के जिम्मेदार भी आप होंगे, हम नहीं। बहरहाल विवाद की नौबत आने ही न दैं। अपने विचारों को ईमानदारी से आप अपने अपनों तक पहुंचाए और मस्त हो जाएं हमारी यही मंगल कामनाएं...
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Saturday, February 26, 2011
Wednesday, February 23, 2011
Tuesday, October 19, 2010
सुरेश नीरव की ग़ज़ल
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Thursday, January 14, 2010
।अमर शहीद अशफाकउल्ला खां की एक गज़ल
सितमगर अब ये आलम है तेरे बीमारे फुरकत का
लबों पर दम है दिल में बलबला शौके शहादत का
मेरी दीवानगी पर चारागर हैरां न हो इतना
यही अंज़ाम होना चाहिए नाकाम उल्फत का
बुताने संग दिल सुनते नहीं फरियाद बेकस की
निराला ढंग है उन खुदपरस्तों की हकूमत का
मिटा कर जानों दिल अपना किसी ज़ालिम ज़फाजू पर
तमाशा अपनी आंखोम देखता हूं अपनी किस्मत का
हविस हूरों कि हो जिस में दिलाए याद गिल्मा की
जनाबे शेख मैं कायल नहीं ऐसी रियाज़त का
मज़ा जब है कि वह कह उठेंअशफाक उनका क्या कहना
गज़ल है या मुरक्का है तेरे वक्ते मुसीबत का।
Tuesday, October 14, 2008
एक चिंगारी कहीं से लाइये,
गज़ल
एक चिंगारी कहीं से लाइये,
इन बुझे शोलों को फिर भडकाइये.
इस अन्धेरे को मिटाने के लिये,
रोशनी का एक क़तरा चाहिये.
लाइये जुगनू कहीं से खोजकर ,
और हमको रास्ता दिखलाइये.
आपकी हर बात पर विश्वास है,
एक चिंगारी कहीं से लाइये,
इन बुझे शोलों को फिर भडकाइये.
इस अन्धेरे को मिटाने के लिये,
रोशनी का एक क़तरा चाहिये.
लाइये जुगनू कहीं से खोजकर ,
और हमको रास्ता दिखलाइये.
आपकी हर बात पर विश्वास है,
आप तो झूठी कसम मत खाइये.
क्या पता कोई कही ठुकरा न दे,
सबके आगे हाथ मत फैलाइये.
हर जगह सम्वेदना मिलती नहीं,
हर किसी का द्वार मत खटकाइये.
फेंकिये सारी नक़ाबें नोचकर,
असली चेहरा सामने तो लाइये
Posted by अरविन्द चतुर्वेदी
झूठी कसम मत खाइये.
आपकी हर बात पर विश्वास है,
आप तो झूठी कसम मत खाइये.
हर जगह सम्वेदना मिलती नहीं,
हर किसी का द्वार मत खटकाइये.
अरविंद चतुर्वेदी
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