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Saturday, June 16, 2012

विदेशी भाषा के रूप में हिन्दी शिक्षण : परिदृश्य' और "यूरोपीय हिन्दी संगोष्ठी 2012"

विदेशी भाषा के रूप में हिन्दी शिक्षण : परिदृश्य' और "यूरोपीय हिन्दी संगोष्ठी 2012"
(डॉ.) कविता वाचक्नवी



आज का सुप्रभात दरवाजे पर तेज खटखटाए जाने पर टूटी नींद से हुआ ।

 डाक में हिन्दी बुक सेंटर से अभी अभी कुछ ही दिन पूर्व प्रकाशित -  " विदेशी भाषा के रूप में हिन्दी शिक्षण : परिदृश्य : संगोष्ठी समग्र "  ग्रंथ की  लेखकीय प्रति मिली है। 

यह ग्रंथ प्रोफेसर श्रीश चंद्र जैसवाल जी के सम्पादन में छपा है और स्पेन के वय्यादोलिद विश्वविद्यालय में हुई यूरोपीय हिन्दी संगोष्ठी (15-17 मार्च 2012)  में  प्रस्तुत किए गए सभी शोध पत्रों का संकलन है। 

पूरा ग्रंथ आर्ट पेपर जैसे कागज़ पर छपा है। ग्रंथ के स्वत्वाधिकार हिन्दी विभाग, विदेश मंत्रालय के पास सुरक्षित हैं। 


कुल 32 आलेख इसमें संकलित हैं।  लेखों का क्रम सत्रवार रखा गया है। 

मेरे आलेख " भाषा प्रकार्यों के अधुनातन संदर्भ और हिन्दी " को पृष्ठ  46 से 51 पर पढ़ा जा सकता है।



प्रकाशक का पूरा पता है  -

हिन्दी बुक सेंटर 
4/5-बी, आसफ अली रोड, नई दिल्ली 110 002 



सम्मिलित लेखक हैं -

सर्वश्री

  • उदय नारायण सिंह (विश्वभारती शांति निकेतन )
  • अफजाल अहमद (Lisboa)
  • अलका आत्रेय चूडाल (ऑस्ट्रिया)
  • आलेसांद्रा कोंसोलारो (इटली)
  • यूस्तीना कुरोव्स्का (बॉन, जर्मनी)
  • महेंद्र किशोर वर्मा (यॉर्क)
  • रमेश चन्द्र शाह (बेल्जियम)
  • ऐश्वर्ज कुमार (केंब्रिज )
  • गेनादी श्लोम्पेर (इज़राईल)
  • हर्मन वान ऑल्फेन (अमेरिका)
  • कविता वाचक्नवी (लंदन )
  • अरुण प्रकाश मिश्रा (स्लोवेनिया)
  • बिलजाना ज़्रनिक (क्रोएशिया )
  • दानूता स्ताशिक (पोलैंड )
  • हैंज़ वेर्नर वैस्लर (उपासला, स्वीडन )
  • इंदिरा गाज़िएवा (मॉस्को)
  • लुदमीला खोखलोवा (मॉस्को)
  • सबीना पोपर्लान (बुखारेस्ट, रोमानिया )
  • विजया सती (बुदापैस्ट)
  • मोहन कान्त गौतम (नीदरलैंड)
  • जगन्नाथ वी. आर. (वर्धा )
  • वैश्ना नारंग (दिल्ली)
  • कैलाश नारायण तिवारी (पोलैंड )
  • नवीन चंद्र लोहानी (स्विट्जरलैंड)
  • एस. वी. एस. एस. नारायण राजू (बुल्गारिया)
  • तात्याना औरन्स्कया (हैम्बर्ग, जर्मनी)
  • शिव कुमार सिंह (लिस्बन, पुर्तगाल )
  • दीप्ति गोलानी (बार्सेलोना, स्पेन)
  • श्रीश चंद्र जैसवाल (वय्यादोलिद, स्पेन)
  • अशोक चक्रधर (दिल्ली)
  • विभूति नारायण राय (वर्धा)
  • पूनम जुनेजा (मॉरीशस)

स्पेन संगोष्ठी के बारे में अधिक जानने व चित्रों के लिए निम्नलिखित लिंक्स क्लिक कर देखें - 




Monday, November 16, 2009

स्रोता पढ़े-लिखे थे,संजीदा थे और रसवंत भी थे।

 व्यथा की कथा का लोकार्पण

ग्वालियर-14 नवंबर, प्रभात चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा एशिया के सुप्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ. भारतेन्दु शुक्ल की चौथी काव्यकृति व्यथा की कथा का लोकार्पण रतन ज्योति नेत्र चिकित्सालय के सभागार में आयोजित किया गया। यह चिकित्सालय खेड़ापति रोड पर स्थित है और इस समय मध्य प्रदेश के अव्वल नेत्र अस्पतालों में एक है। शहर के सङी नामचीन साहित्यकार एवं राजनेता इस अवसर पर मौजूद थे और मेरे लिए सबसे ज्यादा गौरव की बात यह थी कि जिस शहर मुझे कङी बीज रूप में देखा था वही शहर आद मुझे एक  तरुवर के रूप में मान्यता दे रहा था। वयोव्रद्ध साहित्यार की इस कृति का मेरे हाथों लोकार्पण मेरे लिए हर्ष का ही विषय है ऐसा नहीं कि इससे पहले मैंने ग्वालियर में किसी और लेखक की पुस्तक का लोकार्पण नहीं किया हो मगर इस बार के कार्यक्रम का वर्ग चरित्र कुछ और ही था। सारे स्रोता पढ़े-लिखे थे,संजीदा थे और रसवंत भी थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ कविवर पं. प्रकाश मिश्र के उदबोधन से हुआ।  पं. सुरेश नीरव को इसके बाद बोलने का मौका मिला। इसके बाद डॉ. पुनम चंद तिवारी और सत्यकाम विद्यालंकार ने आलेख पढ़े। अंत में कवि ने अपने सध्यः प्रकाशित संग्रह से खुछ कविताएं भी पढ़ीं। संचालन बड़ी कुशलता के साथ कादंबरी आर्य ने किया। स्वादिष्ट स्वल्पाहार के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ।

Sunday, October 19, 2008

भगवान सिंह हंस की काव्य-कृति

सापेक्ष प्रकाशन की ओर से हिंदी कवि भगवान सिंह हंस की काव्य-कृति सफर शब्दों का अभी हाल में प्रकाशन हुआ है। ९५ पृष्ठ की सजिल्द इस पुस्तक का मूल्य ९० रुपए है। पुस्तक प्रकाशन के अवसर पर उन्हेंपं. सुरेश नीरव,रमाकांत पूनम, मृगेन्द्र मकबूल,अरविंद पथिक, पी.एन.सिंह, रजनीकांत राजू, डॉ.अमर नाथ अमर तथा अन्य अनेक साहित्यकारों ने बधाई दी है। बहुत जल्दी ही पुस्तक के लोकार्पण का समारोह दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।