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Monday, November 16, 2009

स्रोता पढ़े-लिखे थे,संजीदा थे और रसवंत भी थे।

 व्यथा की कथा का लोकार्पण

ग्वालियर-14 नवंबर, प्रभात चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा एशिया के सुप्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ. भारतेन्दु शुक्ल की चौथी काव्यकृति व्यथा की कथा का लोकार्पण रतन ज्योति नेत्र चिकित्सालय के सभागार में आयोजित किया गया। यह चिकित्सालय खेड़ापति रोड पर स्थित है और इस समय मध्य प्रदेश के अव्वल नेत्र अस्पतालों में एक है। शहर के सङी नामचीन साहित्यकार एवं राजनेता इस अवसर पर मौजूद थे और मेरे लिए सबसे ज्यादा गौरव की बात यह थी कि जिस शहर मुझे कङी बीज रूप में देखा था वही शहर आद मुझे एक  तरुवर के रूप में मान्यता दे रहा था। वयोव्रद्ध साहित्यार की इस कृति का मेरे हाथों लोकार्पण मेरे लिए हर्ष का ही विषय है ऐसा नहीं कि इससे पहले मैंने ग्वालियर में किसी और लेखक की पुस्तक का लोकार्पण नहीं किया हो मगर इस बार के कार्यक्रम का वर्ग चरित्र कुछ और ही था। सारे स्रोता पढ़े-लिखे थे,संजीदा थे और रसवंत भी थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ कविवर पं. प्रकाश मिश्र के उदबोधन से हुआ।  पं. सुरेश नीरव को इसके बाद बोलने का मौका मिला। इसके बाद डॉ. पुनम चंद तिवारी और सत्यकाम विद्यालंकार ने आलेख पढ़े। अंत में कवि ने अपने सध्यः प्रकाशित संग्रह से खुछ कविताएं भी पढ़ीं। संचालन बड़ी कुशलता के साथ कादंबरी आर्य ने किया। स्वादिष्ट स्वल्पाहार के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ।

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