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Friday, December 17, 2010

तिवारीजी का प्रशंसनीय आयोजन

आदरणीय पंडित सुरेश नीरवजी,
आपका व्यंग्य शोकसभा का कुटीर उद्योग पढ़ा। बड़े गहरे उतरकर आप ने जीवन के समुद्र से व्यंग्य की सीपियां चुनी हैं। जो गहरे उतरने की क्षमता रखता है। हीरे-मोती वही ढूंढ़ पाता है। आप कुशल तैराक और निपुण गोताखोर दोनों ही हैं। आप जितने गहरे हैं उतने ही ऊंचे भी हैं। इसीलिए आप के लेखन में ऊंचाई और गहराई दोनों देखने को मिलती हैं।
प्रशांत योगीजी का आरक्षण को लेकर जो आलेख है वह सामाजिक समस्या के समाधान का आद्यात्मिक प्रयास है। लेकिन जब तक देश में वोटों की राजनीति है तब तक आरक्षण समाप्त नहीं होगा यह तय है। परंपराओं पर उनका लेख हमें नए ढ़ंग से सोचने की प्रेरणा देता है।
आदरणीय श्री विश्वमोहन तिवारीजी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के बलिदान दिवस पर कविगोष्ठी का आयोजन कर रहे हैं, यह एक महत्वपूर्ण कार्य है। हमें आज के दौर में अपने शहीदों को पूरे शिद्दत के साथ करना चाहिए। मैं इस कार्यक्रम की सफलता की कामना करता हूं। अपरिहार्य कारणों से शहर से बाहर मुझे जाना पड़ रहा है,इसलिए चाहकर भी सम्मिलित नहीं हो पा रहा हूं। तिवारीजी एक संवेदनशील साहित्यकार हैं। और देश के प्रति अपने फर्ज के प्रति जागरुक भी। जयलोकमंगल की ओर से मैं उनके प्रयास की प्रशंसा करता हूं।
भगवान सिंह हंस
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