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Friday, January 7, 2011

इस्लाम देश भी आत्मा और पितरों की मान्यता को स्वीकारता है


 इजिप्ट और भारत
पंडित सुरेश नीरव
इजिप्ट जाने से पहले मन में जिज्ञासा है कि आखिर इजिप्ट और भारत में क्या समानताएं रही होंगी या कि क्या समानताएं आज भी हैं तो  सबसे पहले मुझे जो समानता दिखी वह है नदी की सभ्यता। हमारी सभ्यता सिंधु घाटी की सभ्यता के नाम से जानी जाती है तो मिश्र की सभ्यता भी नील नदी की सभ्यता कहलाती है।  हमारे यहां नीलगिरि के नाम से पर्वत है तो मिश्र में नील नदी है। हमारे यहां जितने पूजनीय नीलकंठ महादेव हैं उतनी ही पूजित नील नदी है। हमारे भगवान राम नील-नीलज सुंदरम हैं। हमारे भगवान राम की सेना में भी एक सेनापति नील है। तो कहीं-न-कहीं हमारी संस्कृति ने मिश्र की संस्कृति को छुआ अवश्य है। अब यदि मिश्र के अर्थ की पड़ताल करें तो मिश्र हमारे यहां अत्यंत सम्मानसूचक शब्द है। और बहुत आदरणीय व्यक्ति के साथ लगाया जाता रहा है-मसलन-वसिष्ठ मिश्र और मंडन मिश्र। नील नदी के किनारे बसे इस देश की सभ्यता ने हो सकता है कि इसे मिश्र होने का दर्जा हासिल करवाया हो। नीलअंबर हमारे यहां शनि को कहते हैं। नील नदी के वासी शनि के उपासक थे। हो सकता है इसीलिए उन्होंने अपनी महत्वपूर्ण नदी का नाम नील रखा हो। अब बात इजिप्ट की। इजिप्ट में इ का अर्थ है- कामदेव,जीतना,क्रोध करुणा, आश्चर्य ,पुकारना और खिड़की। जिप्त का अर्थ है-जीतना। तो वह देश जिसने आश्चर्य को जीत लिया हो। वह इजिप्ट है। जहां से अज्ञात की खिड़की खुलती हो। जिस खिड़की से क्रोध करुणा को पुकारता हो। भारत की तरह इजिप्ट में भी अध्यात्म की विरासत है। यहां पिरामिड और मेफिंस हैं। मेफिस का मतलब है- होम ऑफ का। यानीकि आत्मा का घर। ये मेफिंस आत्मा के मंदिर हैं। परमात्मा को तो सब पूजते हैं मगर आत्मा को मंदिर में बैठाकर पूजनेवाला देश इजिप्ट ही है। पहले इजिप्ट को केमरेट कहा गया यानीकि काली धरती। रेड सी के पास होने के कारण इसे डेशरेट भी कहा जाने लगा। इसी शब्द ने आगे सफर किया तो डेजर्ट शब्द बना। डेशरेट का मतलब है-लाल धरती। यहां सहरा बहुत हैं इसलिए डेजर्ट रेगिस्तान का पर्याय बन गया। रमदान यहां का स्थानीय त्योहार है। इस अव,र पर लोग फानुसी जलाते हैं हमारे यहां भी राम आगमन पर दीपावली मनाई जाती है। और दिए जलाए जाते हैं। हमारे देश में पितरों को पूजने की परंपरा है। और हम मानते हैं कि हमारे पितृगण सूर्यलोक से भी ऊपर पितृलोक में निवास करते हैं। इजिप्ट के कवि अब्दुलरहमान आबनूसी की पुस्तक बोट ऑफ मिलियंस में भी वर्णन है कि मरने के बाद आत्माएं नाव में बैठकर सूर्यलोक जाती हैं। और हर रात अंधेरा का विशाल सांप सूरज पर हमला करता है। पितरों की आत्माएं उसे रोज नाव में बैठाकर सुरक्षित घरती पर ले आती हैं। इस कारण ही सुबह होती है। इस प्रकार इस्लाम देश भी आत्मा और पितरों की मान्यता को स्वीकारता है। कुछ ऐसी समानताएं मैंने इजिप्ट और भारत की संस्कृति में देखी हैं। अगर हमारे यहां ताजमहल है तो इजिप्ट के हिस्से में भी विश्वप्रसिद्ध पिरामिड हैं। यदि हमारे यहां हीर-रांझा हैं तो इजिप्ट में भी किलियोपेट्रा और मार्क एंटनी हैं। जिन्हें जब सीजर अगस्टस गिरफ्तार कर लेता है तो ये प्रेमी युगल आत्म हत्या कर लेता है। हमारे यहां अगर शाहजहां और मुमताज की प्रेम कथाएं हवाओं में गूंजती हैं तो इजिप्ट में भी फराओ अकनातेन और नेफरीतीती की प्रेमकथाएं इतिहास में दर्ज हैं। इजिप्ट पर भी तुर्क,रोम,फ्रांसिसी और अंग्रेजों का राज्य रहा है भारत पर भी मुगल, प्रेंच,पुर्तगाल और अंग्रेजों का कब्जा रहा है। भारत भी कृषि प्रधान देश है तो इजिप्ट भी कृषि प्रधान देश है। आज भारत भी स्वतंत्र गणतंत्र है तो इजिप्ट भी स्वतंत्र गणतंत्र है। पिरामिड के वास्तु को भारत ने अत्यंत वैज्ञानिक माना है। हमारे यहां अब ज्योतिषि घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता के प्रतीक रूप में पिरामिड रखने की सलाह दे रहे हैं। शायद यही समानताएं हैं भारत और इजिप्ट के बीच में जिस कारण हम आज इजिप्ट में हैं।

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