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Wednesday, February 2, 2011

पंडित सुरेश नीरव को मिली ब्रह्मर्षि की उपाधि

रात के टुकड़ों पे पलना छोड़ दे
शम्अ से कहना के जलना छोड़ दे
मुश्किलें तो हर सफ़र का हुस्न हैं,
कैसे कोई राह चलना छोड़ दे.।
वसीम बरेलवी
मै हूँ प्यासा पथिक तुम मेरी प्यास हो
मै हृदयरूप हूँ तुम मेरी श्वांस हो
कौन कहता है हममे है दूरियां
हर घडी हर पल तुम मेरे पास हो I 
वेदप्रकाश
 वाराणसी में मिली 
पंडित सुरेश नीरव को 
ब्रह्मर्षि की उपाधि
काव्य अभ्यर्चना समारोह  का विशेष
अनुष्ठान..
लेखनी को मिली एक अप्रतिम पहचान
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ग्वालियर में बही काव्य-गंगा
पंडित सुरेश नीरव के संग 
जगदीश परमार और मधूलिका सिंह ने जमाया कविता का रंग 
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