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Sunday, February 27, 2011

कहे मक़बूल हम ऐसे मददगारों से डरते हैं

मक़बूलजी
सचमुच ऐसे मददगारों से डरकर ही रहना चाहिए जो मदद करने के लिए पहले आदमी को अपने जाल में फांसकर निरीह बना देते हैं। और लतीफेबाजों ने तो तदजीब का कचूमर निकाल ही दिया है। मुबारकां.मुबारकां
पंडित सुरेश नीरव
अलिफ़ तहज़ीब की जिनके कभी ना पास आई हो
लतीफ़ेबाज़ जो होते, वो फ़नकारों से डरते हैं।

पहले जाल में फांसे, बना कर बात मीठी जो
कहे मक़बूल हम ऐसे मददगारों से डरते हैं।
मृगेन्द्र मक़बूल
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