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Wednesday, March 16, 2011

मैं चाहता हूँ ,मैं तेरी हर बात में मिलूं......

उसने मेरी जिंदगी को यूँ मुकम्मल कर दिया
काठ के टुकड़े को जैसे छूकर चन्दन कर दिया
जो समन्दर हो गया वो प्यास का दुश्मन हुआ
बस इसी अहसास ने मुझको बादल कर दिया।
00
मैं चाहता हूँ ,मैं तेरी हर बात में मिलूं..............
जीवन की खुश्क धुप में बरसात में मिलूं ........................
कोई खुदा के दर पे मुझे ढूँढता फिरे ..............................
..
मैं भी किसी को प्यार की सौगात में मिलूं .............
धड़कन हो,या हो दर्द या अह्सासे मुहब्बत ............
मैं तुम्हारे दिल के हर ज़ज्बात में मिलूं ..............................
.....
तडपे हज़ारों दिल मगर हासिल न मैं हुआ............
तू चाहता है मैं तुझे खैरात में मिलूं ..............................
...........
खंडहर सहेजूँ ख्वाब के या रंग दूँ उसे ..........
मैं जिंदगी से कितने सवालात में मिलूं।
अंगार
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