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Saturday, January 21, 2012

निरंकारदेव सेवक जी की याद में समारोह

मंच पर पूनम सेवक, इन्द्रदेव त्रिवेदी, हरी ओम अनजान,रमेश विकट, किशन सरोज और डा. नागेश पांडेय 'संजय'
बरेली / 
१९ जनवरी को स्वर्गीय निरंकारदेव सेवक जी के  जन्म दिन के अवसर पर रोटरी क्लब में एक भव्य आयोजन किया गया. सेवक जी हिंदी  महान बाल साहित्यकार एवं समीक्षक थे.  आजन्म बाल साहित्य सेवा में लगे रहे. १९६६ में उन्होंने तब 'बाल गीत साहित्य' नाम से एक समीक्षा ग्रन्थ लिखा , जब इस क्षेत्र में समीक्षात्मक पुस्तकें थीं हीं नहीं. उनकी रचनाएँ  आज भी नयी और कालजयी हैं. 
इस अवसर बाल कविता प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, पुरस्कृत बच्चों को ५००/-, ३००/- और २००/- रूपये की धनराशि के अतिरिक्त बाल साहित्य की पुस्तकें और सभी बच्चों को प्रमाण पत्र दिए गए. बच्चों में साहित्यिक अभिरुचि जाग्रत करने का यह सफल प्रयोग था. 
समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात गीतकार किशन सरोज ने सफल समाज हेतु बाल साहित्य के अधिकाधिक प्रयोग की आवश्यकता जताई. 
पूर्व विधान परिषद् सदस्य रमेश विकट, साहित्यकार डा. अवनीश यादव, कवि हरी ओम अनजान, बाल साहित्य पर शोध कर रहे ऋषि कपूर , तितली के संपादक फहीम करार, भारतीय पत्रकारिता संस्थान के सुरेन्द्र बीनू सिन्हा और सेवक जी की पुत्र वधु पूनम सेवक सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने इस आयोजन की शोभा बढ़ाई. 
इन्द्रदेव त्रिवेदी के सफल संचालन में संपन्न इस समारोह की अध्यक्षता बाल साहित्यकार डा. नागेश पांडेय 'संजय' ने की . 

Thursday, January 5, 2012

"स्त्री होकर सवाल करती है!" : "कविता समय"





"स्‍त्री होकर सवाल करती है....!"
- (डॉ.) कविता वाचक्नवी 


यदि आप जयपुर में हैं तो अवश्य सम्मिलित हों .....

आप सादर आमंत्रित हैं ...............................


"स्‍त्री होकर सवाल करती है....!"
(127 रचनाकारों की स्‍त्री विषयक कविताओं का संग्रह)


प्रकाशक - बोधि प्रकाशन (जिन्होंने प्रत्येक पुस्तक का दाम 100/- मात्र की अपनी प्रतिबद्धता के कारण नया कीर्तिमान स्थापित कर एक नई परंपरा को जन्म दिया व हिन्दी पुस्तकों के क्षेत्र में नई क्रान्ति के बीज रोप कर सर्वत्र ख्याति पाई है )

संपादक - डॉ लक्ष्‍मी शर्मा

पेपरबैक/प्रथम संस्‍करण - जनवरी 2012

पृष्‍ठ  - 384

मूल्‍य - 100 रुपये मात्र

लोकार्पण  - दिनांक 8 जनवरी 2012, रविवार, सुबह 11.45, ''कविता समय'' कार्यक्रम के कविता पाठ सत्र में

स्‍थान: राजस्‍थान हिन्‍दी ग्रंथ अकादमी, झालाना सांस्‍थानिक क्षेत्र, जयपुर


मुझे हर्ष है कि मेरी कविताएँ भी इस संकलन में सम्मिलित हैं।



384 पृष्ठ की इस पुस्तक का मूल्‍य 100 रुपये मात्र है (डाक से मँगाने पर पैकेजिंग एवं रजिस्‍टर्ड बुकपोस्‍ट के 50 रुपये अतिरिक्‍त)।



 इसे Bodhi Prakashan ने प्रकाशित किया है। 

उनके "बोधि प्रकाशन, एफ 77, करतारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया, बाईस गोदाम, जयपुर 302006 राजस्‍थान। संपर्क दूरभाष : 099503 30101, 08290034632 (अशोक) " के पते से इसे क्रय किया जा सकता है। 

जो भी मित्र इस पुस्तक की समीक्षा/ पुस्तक चर्चा / रिव्यू इत्यादि लिखें, उनसे निवेदन है कि कृपया उसे Maya Mrig जी, बोधि प्रकाशन तथा मुझसे + अन्य सम्मिलित लेखकों से अवश्य बाँटें/ सूचित करें।

कविता समय कार्यक्रम की अद्यतन जानकारियों के लिए देखें -  यह लिंक 

Monday, September 20, 2010

बात-चीत

कवि सम्मेलन का विचार अच्छा है


श्री भगवान सिंह हंसजी,


लोकमंगल कवि सम्मेलन का विचार बहुत ही अच्छा है। इस माध्यम से हमारे सभी कवि मित्र अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे। और पाठकों को भी कुछ रुचिवान चीजें पढ़ने को मिल जाएंगी। सवाल यह है कि इस कवि सम्मेलन को बिना किसी विषय के रखा जाए या फिर कोई विषय देकर रखा जाए। इस मुद्दे पर सभी साथी पहले अपनी-अपनी राय दें तो आयोजन करने में सुगमता होगी। साथ ही यह भी तय हो जाए कि क्या इसमें रचनाएं सिर्फ सदस्यों की ही होंगी। मेरा मतलब है कि जयलोकमंगल का सदस्य यदि अपनी रचना के अलावा किसी और कवि की कविता भेजता है तो क्या उसे इसमें सम्मिलित किया जाए या नहीं। कवि सम्मेलन को कवि सम्मेलन का रूप दिया जाए या कि काव्य-प्रतियोगिता का। और जो रचनाएं श्रेष्ठ हों उन्हें प्रथम,द्वितीय और तृतीय घोषित किया जाए। मैं इस दिशा में पहले अपने सदस्यों की राय जानना जरूरी समझ रहा हूं। आयोजन किया जाए इस बात से मैं भी सहमत हूं। मुझे विश्वास है कि सभी साथी पहले अपनी राय दे-देंगे ताकि कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा सके। साथ ही इसकी अंतिम तिथि क्या हो इस पर भी अपने विचार दें तो अच्छा रहेगा।

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सुस्वागतम---
और एक खुशखबरी दया निर्दोषी जयलोकमंगल की सदस्य बन गई हैं। हमें यकीन है कि जयलोकमंगल में उनकी रचनाएं हमें निरंतर पढ़ने को मिलेगी और उनकी भागीदारी सक्रियरूप से ब्लाग पर बनी रहेगी। अपने सदस्यों को मैं यह बताना जरूरी समझता हूं कि दया निर्दोषी दिल्ली सरकार में शित्रिका हैं और राज्यस्तर पर आयोजित होनेवाली तमाम प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत हो चुकी हैं। और एक संवेदनशील कवयित्री के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। अभी हाल में प्रकाशित काव्यसंग्रह पश्यंती में उनकी रचनाओं ने पाठकों की दृष्टि को आकर्षित किया है। बधाई..

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