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Wednesday, March 7, 2012

होली के इन्द्रधनुषी रंगों के साथ बधाई


सम्मान्य सुरेश नीरव जी, 
कल दूरदर्शन पर 
आपके कुशल संचालन में
 काव्य गोष्ठी 
का 
भरपूर 
सपरिवार आनंद
 लिया.
 होली के इन्द्रधनुषी रंगों के साथ 
मेरी बधाई 
एवं 
मंगलकामनाएँ 
स्वीकार करें.
 डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'

Thursday, September 15, 2011

अरविन्द पथिक की बेजोड़ कृति ''बिस्मिल चरित''

मेरे आत्मीय कवि मित्र अरविन्द पथिक की बेजोड़ कृति ''बिस्मिल चरित'' पर इस वर्ष भाऊराव  देवरस सेवा न्यास , लखनऊ का प्रताप नारायण मिश्र स्मृति पुरस्कार (५,०००/=) मिलेगा. हम मित्रों का ही नहीं शाहजहांपुर जनपद का भी मानवर्धन किया है पथिक जी ने. उन्हें अछोर बधाई. 

Friday, March 18, 2011

होली की रंग भरी ,उमंग भरी शुभ कामनाएं

आप सभी को होली की रंग भरी ,उमंग भरी शुभ कामनाएं

धीरे - धीरे आ गया , होली क़ा त्यौहार
मेरे मन की कामना हो तुमको स्वीकार
सबको वो सब मिल सके जिसकी जिसको चाह
खुशियों से महका रहे, सबका घर संसार -

- नित्यानंद `तुषार`

Friday, December 31, 2010

नववर्ष शुभ हो


जयलोकमंगल के सभी साथियों को नववर्ष की शुभकामनाएं।
0 श्री प्रशांत योगीजी ने बहुत अच्छी तस्वीर भेजी है। और उसमें नीरवजी की पंक्तिया जोड़कर उसमें सोने पे सोहागा कर दिया।
0 श्री विश्मोहन तिवारीजी कालेख पढ़कर बहुत जानकारी मिल रही है। यह जयलोकमंगल के लिए एक विशेष तोहफा है। उनके विचार में विश्लेषण और दर्शन की छटा देखने को मिलती है।
0श्रीहंसजी का भरत चरित ज्ञानवर्धक है।
जयलोक मंगल..
मुकेश परमार

नूतन नववर्ष अभिनंदन

नववर्ष शुभ हो
सन 2011 आपके जीवन में नभ आशा की किरणें लेकर आए और आप सभी प्रगति के नए सोपानों पर चढ़ें जयलोकमंगल के सभी साथियों को शुभकामनाएं..
हीरालाल पांडेय

2011 शुभ हो


जयलोकमंगल के सभी साथियों को सन 2011 शुभ हो। हम सभी प्रगति करें.सद्भाव रखें और प्रेममय हों..
मधु मिश्रा

नववर्ष शुभ हो

         जयलोक मंगल के सभी साथियों को नव वर्ष की अनेकानेक 
                                  हार्दिक शुभकामनाएं
जितने भी साथियों ने अपने रचनात्मक सहयोग से जयलोक मंगल ब्लॉग को हरा-भरा रखा है मैं  उन सभी का आभारी हूं। और विश्वास करता हूं कि जो व्यस्तावश कम लिख पाएं हैं वे इस साल ज्यादा लिखकर अपना लेबल फिर बना लेंगे।
पंडित सुरेश नीरव

Monday, December 27, 2010

क्षितज पर खड़ा नव दिवस कह रहा

श्री बी.एल.गौड़ साहब,
आपकी नव वर्ष के उपलक्ष में जो कविता से लिपटीं शुभकामनाए जयलोक मंगल को मिली हैं,वह एक बेशकीमती तोहफा है। हमारे व्लॉग के लिए। प्रस्तुत पंक्तियों में तो आपने नए साल में संभावनाओं के उन रंगों को भी भरने का आह्वान किया है,जो किसी कारण से पिछले साल फीके रह गए थे..नववर्ष पर आपको भी आत्मीय और अग्रिम शुभकामनाएं
क्षितज पर खड़ा नव दिवस कह रहा
चलो इन पलों को सुनहरा करें
गत वर्ष में जो रंग फीके रहे
आज फिर से उनेंह हम गहरा करें
बी एल गौड़

Thursday, December 23, 2010

कुदरत कवि बना देती है

श्रद्धेय नीरवजी,
आपके धर्मशाला प्रवास का समाचार पढ़ा। आप प्रकृति की मनोरम वादियों में बैठकर कविताओं के मधुर क्षणों को आत्मसात करें। और ख़ूब तरो-ताजा होकर लौटें। और फिर आकर बेहतरीन कविताओं का सृजन करें। कुदरत के पास जाने से आदमी कुदरतन कवि हो जाता है और फिर आप तो सिद्ध-प्रसिद्ध कवि हैं हीं। आदरणीय प्रशांत योगीजी के विचारपरक आलेख तो हम पढ़ते ही रहते हैं। वहां बैठकर आप लोगों का और गंभीर विमर्श होगा,ऐसा मैं मानता हूं। मेरी शुभकामनाएं...
मुकेश परमार
जीवेम शरदः शतम

कल 24 दिसंबर को सुप्रसिद्ध कवि  आदरणीय जगदीश परमार (ग्वालियर) का जन्मदिन है। वे अपने जीवन के 79 वसंत पूरे कर रहे हैं। जयलोक मंगल की ओर से उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं।

Saturday, November 27, 2010

कभी-कभी ऐसा भी तो होता है

बहुत दिनों से कार्यक्रम बना रहा था कि प्रशांत योगीजी की सालगिरह पर मैं उनके धर्मशाला स्थित यथार्थ मेडीटेशनसेंटर में बैठकर सालगिरह उनके साथ मनाऊं और उन क्षणों का स्वयं साक्षी पनूं जो उत्सव की सात्विक गंध से महकते हों मगर ्त्यंत अपरिहार्य कारणों से मुझे वृंदावन जाना पड़ा इसलिे चाहकर भी मैं वहां उपस्तित नहीं हो सका मगर मेरी सूक्ष्म आत्मा वहीं है। उन्हीं के साथ,वह इसे महसूस करें..मेरी ईमानदार शुभकामनाएं उनकी दीर्घायु के लिए..
पंडित सुरेश नीरव
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जीवेम शरदः शतम

जीवेम शरदः शतम
आज हमारे दार्शनिक मित्र जिनके कथ्य में बकौल अरविंद पथिक प्लेटो की गहराई है,बड़ी धूमधाम से वर्षगांठ आई है। जयलोकमंगल की ओर से उन्हें शतशः बधाई है। वह निरंतर प्रगति के मार्ग पर अग्रसर हों,यशस्वी हों और दीर्घायु हों.. मैं प्रार्थनाभाव से यही कहूंगा कि-
आयुष्मान भव
शुभाकांक्षी
पंडित सुरेश नीरव

Saturday, November 13, 2010

बालदिवस की शुभकामनाएं



चाचा नहरू अमर रहैं
देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म दिवस है। उनके 121वें जन्म दिन पर जयलोकमंगल परिवार की ओर से हम उनका ससम्मान स्मरण करते हैं। हमारी स्मॉतियों में काली शेरवानी में लगा लाल गुलाब आज भी तरोताज़ा है...
डाक्टर प्रेमलता नीलम

Sunday, November 7, 2010

इसका मतलब ये तो हरगिज नहीं कि तुम

शेरनी उवाच- 
ठीक है दीवाली का त्योहार है,इसे हँसी-खुशी मनाना चाहिए,लेकिन इसका मतलब ये तो हरगिज नहीं कि तुम रातभर घर से गायब रहो। कहां गुलछर्रे उड़ा रहे थे। और मैं यहां अकेली जंगल में बैठी तुम्हारी बाट जोहती रही। तुम सारे मर्द एक से होते हो.. हैप्पी दिवाली
-प्रस्तुतिःहीरालाल पांडे

दीपावली की विलंबित ताल में शुभकामनाएं

जयलोकमंगल के सभी साथियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

इस बीच कई नए सदस्य भी बने। मैंने उनकी गतिविधियां भी देखीं। बहुत अच्छा लगा। नए सदस्यों में अशोक शर्मा (हास्य कवि),मजू ऋषि,विमलकांत चतुर्वेदी (सहायक संपादकःनंदन) कविता वाचनक्वी को मैं बधाई देता हूं और उम्मीद करता हूं कि वे अपनी लेखनी से ब्लाक को संजाएगे-संवारेंगे। पंडितजी आपका परिवार यूं ही दिन-रात बढ़ता रहे मेरी ढ़ेर सारी शुभकामनाएं...

०० श्री प्रशांत योगी के प्रवचन कुछ अलग हटकर हैं। और उस पर नीरवजी की टिप्पणी तो सोने पर सुहागा हैं।  उन्होंने आस्था की अच्छी व्याख्या की है।

00 अमित हंस की रचना बहुत अच्छी लगी। कहन में एक नयापन है। और बहाव भी है। उन्हें कुछ और रचनाएं ब्लाग पर देनी चाहिए।
०० श्री विश्वमोहन तिवारी का शंबूक पर और रामवनवास पर शोधात्मक आलेख पढ़ा,जिसने कई भ्रांतियों को तोड़ा। फेसबुक पर उनका अच्छा आलेख पढ़ने को मिला।जहां उन्होंने अधकचरे लोगों की प्रचारप्रियता पर सटीक प्रहार किया है। और  आस्था के लेख में आस्था के एक और आयाम से उन्होंने हमें रू-ब-रू कराया है। 
०० पंडित सुरेश नीरव के धुंआधार व्यंग्य लेखों ने मजा बांध रखा है। लगता है कि लेखों की फैक्ट्री खोल रखी है पंडितजी ने। इतने सारे विचार आखिर उनके दिमाग में आते कहां से हैं। और ये दिमाग किस ब्रांड का है ये पता लगाया जाना चाहिए.
०० श्री भगवानसिंह हंस इन दिनों अच्छी प्रतिक्रियाएं लिख रहे हैं। और भरत चरित महाकाव्य के अंश भी खूब लिख रहे हैं।
०० मकबूलजी गायब हैं। क्यों, क्या बीमार हैं। भगवान उन्हें सेहतमंद बनाए।
00 नीलमजी और प्रलयजी नियमित रहे।
०० पथिकजी ने फोटो पेश किए और मुकेश परमार ने सिर्फ अपना फोटो दिखाया।
00 नए लोगों में विकास हंस ने भी खूब लिखा।
०० मधु चतुर्वेदी ने आपनी हाजिरी ठीक-ठाक लगाई।
00 मंजू ऋषि और विमलकांत चतुर्वेदी के भी सिर्फ फोटो ही देखने को मिले हैं। शायद कभी कुछ लिखें भी।
इन्हीं उम्मीदों के साथ--
दीपावली की विलंबित ताल में शुभकामनाएं


चांडाल

Thursday, November 4, 2010

VERY HAPPY DIWALI

Dear Sir / Ma’am

May this diwali light up new dreams, fresh hopes, Undiscovered avenues, different perspectives,

Everything bright & beautiful And fill your days with pleasant surprises and moments.


WISHING YOU & YOUR FAMILY A VERY HAPPY DIWALI & PROSPEROUS NEW YEAR

Dr. R. G. Chaturvedi

दीपावली की शुभकामनाएं

प्रिय मित्रगण ,
जयलोकमंगल
 
दीपावली की रात अमावस्या की रात होती है ,जब पूरा अन्धकार छाया होता है. ऐसे अन्धेरे में हम एक दिये की रोशनी से उस अन्धकार को दूर करने का प्रयास करते हैं .
 
इस पर्व को सामाजिक सन्दर्भों में देखें तो यह हम सभी का कर्तव्य बनता है अपने आस-पास सभी प्रकार के अन्धेरों, विकारों व नकारात्मक शक्तियों को दूर करने के लिये ज्ञान, प्रेम व शांति का एक दिया जलायें.
 
 
दीपावली के इस पावन पर्व पर आप प्रकाश को उत्सर्जित करने के इस प्रयास में सफल हों,यही मंगल कामना है.
सफलता आपके कदम चूमे व आपका मान -सम्मान दिग-दिगंत में फैले-शुभ कामनायें
 
 
                                                                           
 
                                                         है अन्धेरी रात ,आओ एक दिया मिलकर जलायें
                                                         जो तिमिर चंहु ओर फैला है ,उसे आओ मिटायें
 
 
                                                         अरविन्द चतुर्वेदी

Wednesday, November 3, 2010

मेरी शुभकामनाएं उन परिवारों के लिए हैं जिन्होंने अपना बलिदान कर इस देश को बचा के रखा है।

 दीपावली की शुभकामनाएं

हम हर साल ही दीपावली की शुभकामनाएं एक दूसरे को देते हैं। यह हमारी संस्कृति है और सामाजिक विवशता भी। लेकिन कितने लोग हैं जो हमारी शुभकामनाओं को गंभीरता से लेते हैं, ये प्रश्न ज्यादा महत्वपूर्ण है।फिर भी औपचारिकता के बतौर ही सही हम ये काम करते तो हैं। अब एक करोड़पति को एक सड़क छाप व्यक्ति शुभकामनाएं दे तो क्या मतलब है इसका। और एक व्यक्ति जो विजनेस में आपको नष्ट करने पर उतारू है उसकी भी शुभकामनाएं आप को आती हैं।  क्या यह एक कारोबार नहीं बन गया है। तो फिर इन शुभकामनाओं के करोड़ों के कारोबार को आप क्या गंभीरता से लेते हैं। शायद हरगिज नहीं। तो फिर क्या जरूरत है हमें यह निरर्थक कवायद करने की। शायद इसलिए क्योंकि हम एक झूठ को ही ज़िंदगी भर जीने को विवश हैं। झूठ को ही हम सेलीब्रेट करते हैं। विश्व के किसी भी देश में लत्र्मी का पूजन नहीं होता। अमेरिका में डालर्स की पूजा नहीं होती इंग्लैंड में पाउंड्स नहीं पहजते,अरब में दीनार नहीं पुजते। केवल भारत है जहां नोटों की पूजा होती है। यह वो देश है जो संपत्ति को माया कहता है। यहीं लक्ष्मी की पूजा होती है। हजारों साल से हो रही है। मगर नतीजा ये कि सोने की चिड़िया रहा ये देश आज गरीबी की रेखा के नीचे जीने को विवश है। हर बजट एक झूठ लेकर आता है। जनता भी इसे बखूबी जानती है। कालाधन इस देश की अर्थव्यवस्था को संचालित करता है। और इसी के मालिक देश को चलाते हैं। पर्दे के पीछे से। शहीदों के कफऩ पर कमीशन खानेवाले भी इसी देश की सरकार में होते हैं। और उनका कुछ नहीं बिगड़ता। ये है इस देश की राजनीति का चरित्र। यहां हर औसत आदमी अपनी नैतिकता को गिरवी रखकर सिर्फ लक्ष्मी चाहता है। तो तय है कि यहां दीपावली बहुत महत्वपूर्ण त्योहार है। आप कैसे भी हो, बस धन कमाएं.। दीपावली पर आपको मेरी शुभकामनाएं।
वैसे मेरी शुभकामनाएं आपके साथ क्यों होंगी,क्या यह आप समझ सकते हैं । मेरी शुभकामनाएं उन परिवारों के लिए हैं जिन्होंने अपना बलिदान कर इस देश को बचा के रखा है। अगर आप इस के काबिल अपने को समझते हैं तो यकीनन मेरी शुभकामनाएं...
पंडित सुरेश नीरव

Sunday, October 17, 2010

मत कर भेजा फ्राई

  1. दशहरे की बधाई -दशहरे की बधाई
    1. थोड़ा नमकीन, थोड़ी खटाई।
    2. सुबह राम, शाम को रावण की याद आई।
    3. ठीक कह रहा हूं न भाई।
    4. मत कर भेजा फ्राई।
                                    डाक्टर अनिल कुलश्रेष्ठ  
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विजये विश्व दशहरा प्यारा

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सत पर असत की विजय का प्रतीक है विजयादशमी। यह त्योहार हमें नैतिक मूल्यों के आलोक में  नई दिशाएं दे. और हम राष्ट्रीय भावनाओं से ओतप्रोत होकर अपने देश और समाज तथा संस्कृति के लिए सर्वश्रेष्ठ करने को सदैव तत्पर रहें इन्ही मंगलकामनाओं के साथ जयलोकमंगल के सभी साथियों को मेरी मंगल कामनाएं।
सत्यमेव जयते..
                                                                    डाक्टर रामगोपाल चतुर्वेदी (जयपुर)
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जयलोकमंगल से जुड़ाव बहुत पुराना हो गया है। अब तो यदि किसी दिन लिख नहीं पाते हैं तो लगता है कि आज कुछ मिस हो गया है। और तीज-त्यौहार पर तो मामला और पेचीदा हो जाता है। पंडित सुरेश नीरव और उनके प्रयासों से आज ब्लाग ने अपनी एक मजबूत स्थिति बनाली है। दशहरे के मौके पर मैं ईश्वर से कामना करता हूं कि हमारा ब्लाग दिन दूना-रात चौगुना विकास करे। पालागन..
मृगेन्द्र  मकबूल (गाजियाबाद)
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Sunday, September 19, 2010

मन की बात

पार्दर्शी संवेदना से लैस एक जागरूक कविता
दया निर्दोषी की कविता मौन बहुत ही पार्दर्शी संवेदना से लैस एक जागरूक कविता है जो हमें मानवीय मूल्यों के निर्धारण के लिए प्रेरित-उत्प्रेरित करती है। कविता वही है जो लिखनेवाले को और पढ़नेवाले को दोनों को ही सुख और आनंद प्रदान करे। इस दिशा में दयाजी की कविता इस कसौटी पर खरी उतरती है। मैं चाहूंगा कि वह जल्दी-से-जल्दी जयलोकमंगल की सदस्य बनें। जैसे विश्वविद्यालय कुछ लोगों को मानद डीलिट देते है वैसे ही मानद सदस्य तो हम दयाजी को पहले से मानते ही हैं। अब औपचारिक सदस्यता भी वे ले-ही-लें।


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मैं भगवानजी के कमंडल का जल हूं। 
श्री भगवानसिंह हंसजी ने अपने शब्दों के कमंडल में भावना का जो गंगाजल भर रखा है, उसके दो-चार छींटे ही पूरे गंगा स्नान का आनंद दे देते हैं। इसी को कहते हैं- जो मन चंगा तो कठौती में गंगा। उनका मन चंगा है। इसलिए वो साधारण जल को भी गंगा जल कर देते हैं। मैं भगवानजी के कमंडल का जल हूं। बस। और कुछ नहीं...।


मेरे पालागन...

                                     पंडित सुरेश नीरव

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